आईआईटी रुड़की और सी-मेट हैदराबाद ने ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक सामग्री अनुसंधान के लिए साझेदारी की
Abhay Pratap Singh | July 3, 2025 | 03:41 PM IST | 2 mins read
नई दिल्ली में टेक-वर्स 2025 कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया।
नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की (IIT Roorkee) और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रौद्योगिकी सामग्री केंद्र (C-MET) हैदराबाद ने उन्नत सामग्री अनुसंधान, ई-कचरा रीसाइक्लिंग एवं प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए एमओयू साइन किया। समझौता ज्ञापन पर आईआईटी रुड़की के ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन सेंटर में सी-मेट हैदराबाद के निदेशक डॉ आर रथीश और आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो केके पंत ने हस्ताक्षर किए।
यह सहयोग दोनों संस्थानों के बीच संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को सुविधाजनक बनाने, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग के लिए अत्याधुनिक प्रक्रिया उपकरणों के विकास और कार्यशालाओं एवं सम्मेलनों की सहकारी मेजबानी के लिए बनाया गया है। शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच यह सहयोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने में संयुक्त प्रयासों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो केके पंत ने कहा, “सी-मेट के साथ यह साझेदारी प्रभावशाली अनुसंधान के लिए एक मार्ग खोलती है, जो इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ सामग्रियों में महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करती है। यह अंतःविषय अनुसंधान और उद्योग-प्रासंगिक नवाचार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।”
सी-मेट के निदेशक डॉ आर रथीश ने कहा, “हमें भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक आईआईटी रुड़की के साथ सहयोग करके खुशी हो रही है। यह समझौता ज्ञापन हमें अगली पीढ़ी के शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को प्रशिक्षित करते हुए उन्नत सामग्री और रीसाइक्लिंग में प्रौद्योगिकी विकास की सीमाओं को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने की अनुमति देगा।”
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक डी. सुरेन्द्र गोथरवाल ने इस बात पर जोर दिया कि, “यह समझौता ज्ञापन न केवल अग्रणी शोध संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि छात्रों और संकायों के लिए उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार उच्च प्रभाव वाले अनुप्रयुक्त अनुसंधान समस्याओं में संलग्न होने के अनूठे अवसर भी खोलता है। ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग पर र संयुक्त ध्यान आज की स्थिरता-संचालित दुनिया में विशेष रूप से प्रासंगिक है।”
आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह समझौता टिकाऊ इलेक्ट्रॉनिक्स, परिपत्र अर्थव्यवस्था और नवाचार-आधारित विनिर्माण में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। नई दिल्ली में टेक-वर्स 2025 कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) के सचिव एस कृष्णन की उपस्थिति में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में सी-मेट त्रिशूर के केंद्र प्रमुख डॉ एस राजेश कुमार भी मौजूद रहे।
अगली खबर
]विशेष समाचार
]- JEE Advanced: जेईई-एडवांस्ड में 3 प्रयास की मांग तेज, 12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने मंत्रालय को दिया प्रतिवेदन
- NITI Aayog Report: स्कूलों में छठी कक्षा से ही रोजगारपरक कौशल पर हो ध्यान, नीति आयोग का सुझाव
- आजादी के 80वें साल में भी 'कागजी' दावों के बीच फंसी शिक्षा व्यवस्था; पेपर लीक व बजट की कमी से जूझ रहे छात्र
- Teacher Vacancy Crisis: बिहार में टीचर्स के 2.70 लाख+ पद खाली; झारखंड, एमपी समेत कई राज्यों में हजारों वैकेंसी
- NEET 2026 Paper Leak: नीट पेपर तैयार और अनुवाद का काम एक ही समूह के शिक्षकों को देने से हुई गड़बड़ी - सूत्र
- MCC NEET Counselling 2026: नीट काउंसलिंग शेड्यूल जल्द, जेपी नड्डा ने की समीक्षा, छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार
- NEET Paper Leak: एक नहीं कई बार लीक हो चुका है नीट का पेपर; जानिए काला सच
- AISHE Reports: अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए जारी
- UDISE Report: वर्ष 2023-24 और 2025-26 के बीच सरकारी स्कूलों में दाखिले में लगभग 86 लाख की कमी आई
- NEET Retest 2026: नीट रीटेस्ट कल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद; गाइडलाइंस जारी, एनटीए की आज देशभर में मॉक ड्रिल