Education Budget 2024: कोचिंग फीस पर 18% जीएसटी में कोई राहत नहीं; नीट अभ्यर्थियों ने बजट को बताया ‘निराशाजनक’

Press Trust of India | July 24, 2024 | 08:19 PM IST | 2 mins read

केंद्रीय बजट 2024-25 मंगलवार (23 जुलाई) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किया गया।

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नीट अभ्यर्थी वैष्णवी ने कहा, “शिक्षा एक अधिकार है, इस पर कोई कर नहीं होना चाहिए।” (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: राजस्थान के कोटा कोचिंग हब में नीट अभ्यर्थियों ने बजट को ‘निराशाजनक’ बताया है। अभ्यर्थियों ने कहा कि कोचिंग फीस पर 18 प्रतिशत जीएसटी में कोई राहत की घोषणा नहीं की गई, जबकि उनकी मांग है कि शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर से नीट की अभ्यर्थी वैष्णवी ने पीटीआई-भाषा से कहा, “शिक्षा एक अधिकार है, इस पर कोई कर नहीं होना चाहिए। अगर कोचिंग फीस पर जीएसटी कम कर दिया जाता, तो इससे हमारे माता-पिता पर वित्तीय दबाव कम हो सकता था, लेकिन यह निराशाजनक है कि ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई।”

केंद्रीय बजट 2024-25 मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किया। हालांकि, वैष्णवी ने शिक्षा ऋण पर ब्याज दरों में कमी की सराहना करते हुए कहा कि इससे खराब वित्तीय पृष्ठभूमि वाले छात्रों को मदद मिलेगी। शिक्षा पर ब्याज में 3 फीसदी की कटौती उन छात्रों के लिए मददगार होगी, जो अधिक फीस देने में सक्षम नहीं हैं।

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एक अन्य नीट अभ्यर्थी महेंद्र सोलंकी (जोधपुर, राजस्थान) ने भी शिक्षा के लिए बजट के कम आवंटन और कोचिंग फीस पर जारी जीएसटी पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने वैष्णवी की बातों को दोहराते हुए कहा कि “शिक्षा एक अधिकार है और शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त होना चाहिए।”

नीट छात्रों ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि निष्पक्ष और धांधली-मुक्त परीक्षा सुनिश्चित कराने तथा परीक्षा एजेंसियों को मजबूत करने के लिए बजट में कुछ धनराशि आवंटित की जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक कोचिंग छात्र के अभिभावक सुशील कुमार ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पेश किए गए तीसरे बजट से हमें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) इंटरमीडिएट के 20 वर्षीय छात्र सयाम दधीच ने कहा, “शिक्षा ऋण पर ब्याज में छूट से कई लोगों को अपना कौशल बढ़ाने में मदद मिलेगी। एक निवेशक के रूप में मुझे यह बजट बहुत निराशाजनक लगता है, क्योंकि अल्पकालिक निवेश के लिए कर स्लैब में काफी हद तक वृद्धि की गई है, जो 15 प्रतिशत से बढ़कर अब 20 प्रतिशत हो गया है।”

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