Saurabh Pandey | August 12, 2026 | 12:55 PM IST | 2 mins read
लोकसभा में पेश किए गए UDISE+ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, केवल एक साल के भीतर देश भर में सरकारी प्राइमरी स्कूलों की संख्या में करीब 10,000 (1.1%) की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

नई दिल्ली : देश भर में सरकारी प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोमवार को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में देश भर में सरकारी एलिमेंट्री स्कूलों की संख्या में लगभग 10,000 की कमी आई है। इसमें मेघालय, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।
लोकसभा में पेश किए गए UDISE+ के आंकड़ों से पता चला है कि एलिमेंट्री लेवल के सरकारी स्कूलों की संख्या 2024-25 में 8,89,806 से घटकर 2025-26 में 8,79,940 हो गई- यानी 9,866 स्कूलों या लगभग 1.1% की कमी आई है।
यह सरकारी डेटा डीएमके सांसद टी.आर. बालू के एक सवाल के जवाब में दिया गया था। उन्होंने पूछा था कि क्या छात्रों की कम संख्या के कारण बड़ी संख्या में एलिमेंट्री स्कूल बंद किए गए हैं और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, शिक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि छात्रों की कमी के कारण असल में कितने स्कूल बंद हुए, जबकि उन्होंने दोनों एकेडमिक ईयर में सरकारी एलिमेंट्री स्कूलों की कुल संख्या बताई।
संख्या के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट मेघालय में दर्ज की गई, जहां सरकारी एलिमेंट्री स्कूलों की संख्या 7,633 से घटकर 5,459 हो गई- यानी 2,174 की कमी आई है। इसके बाद तेलंगाना का नंबर आता है, जहां स्कूलों की संख्या 22,983 से घटकर 21,022 हो गई (1,961 स्कूलों की कमी), जबकि आंध्र प्रदेश में यह संख्या 37,449 से घटकर 36,003 हो गई (1,446 की कमी)।
मध्य प्रदेश में 1,043, कर्नाटक में 615, पश्चिम बंगाल में 587, राजस्थान में 473 और महाराष्ट्र में 357 स्कूल कम हुए। हिमाचल प्रदेश में 259 स्कूलों की कमी दर्ज की गई, जबकि असम में 209 स्कूल कम हुए।
उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों का सबसे बड़ा नेटवर्क है, लेकिन यहां इनकी संख्या में मामूली गिरावट आई है और यह 1,34,115 से घटकर 1,33,948 हो गई है।
हालांकि, हर राज्य में गिरावट दर्ज नहीं की गई है। बिहार में यह संख्या 66,803 से बढ़कर 66,915 हो गई, जबकि छत्तीसगढ़ में 43,836 से बढ़कर 43,853 हो गई। जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में संख्या अपरिवर्तित रही।
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सकल शिक्षा पहुंच अनुपात 2018-19 और 2025-26 के बीच उच्च प्राथमिक स्तर पर 96.49 से बढ़कर 98.14 हो गया, माध्यमिक स्तर पर 88.24 से बढ़कर 95.05 हो गया और उच्च माध्यमिक स्तर पर 65.05 से बढ़कर 94.79 हो गया।
केंद्र ने कहा कि राज्यों को समग्र शिक्षा और प्रधानमंत्री पोषण योजनाओं के माध्यम से सहायता दी जा रही है, साथ ही स्कूल के बुनियादी ढांचे, आवासीय स्कूलों और छात्रावासों, परिवहन सुविधाओं, नामांकन अभियानों, पाठ्यपुस्तकों और ड्रेस के लिए भी सहायता दी जा रही है ताकि स्कूल छोड़ने वालों की संख्या को कम किया जा सके और नामांकन में सुधार किया जा सके।