Trusted Source Image

यूपी के सभी बेसिक शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच करेगी एसटीएफ, इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश

Press Trust of India | October 20, 2026 | 12:45 PM IST | 2 mins read

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों (कक्षा 1 से 8) के सभी शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की एसटीएफ से जांच कराने का निर्देश दिया है। सभी शिक्षकों को एक सप्ताह में अपने कागजात बीएसए के पास जमा करने होंगे।

जांच में खुलासा हुआ कि राज्य में कई शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों या दूसरों के कागजात के आधार पर नौकरी पाई है। (आधिकारिक वेबसाइट)
जांच में खुलासा हुआ कि राज्य में कई शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों या दूसरों के कागजात के आधार पर नौकरी पाई है। (आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को राज्य के बेसिक स्कूलों में तैनात सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षक, एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्रों और शैक्षिक दस्तावेजों की साफ प्रतियां संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के पास जमा करें। इसके बाद, बेसिक शिक्षा अधिकारी इन दस्तावेजों को एसटीएफ के रेंज कार्यालय में जमा करेंगे।

यह निर्देश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ द्वारा जारी किया गया है। उन्होंने एसटीएफ को निर्देश दिया है कि यदि आवश्यक हो, तो संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त की सहायता से दस्तावेजों के सत्यापन के लिए एक ठोस तंत्र विकसित किया जाए। अदालत ने एक ही अंकपत्र पर 10-10 शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति के खुलासे के बाद सभी शिक्षकों को एक सप्ताह में अपने कागजात बीएसए के पास जमा करने के निर्देश दिए हैं।

रिश्तेदारों का ब्योरा और हलफनामा

इसके अलावा, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी शिक्षकों को एक नोटरीकृत हलफनामा भी दाखिल करना होगा। इस हलफनामे में उन्हें अपने उन निकटतम रिश्तेदारों का पूरा विवरण देना होगा, जो उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में बीएसए (BSA) या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

उच्च अधिकारियों द्वारा निगरानी और चेतावनी

अदालत ने आदेश दिया कि राज्य के शिक्षा निदेशक बीएसए द्वारा की जाने वाली इस पूरी प्रक्रिया का सुपरविजन करेंगे और दैनिक निगरानी के लिए किसी अधिकारी को नामित कर सकते हैं। इसी प्रकार, पुलिस अपर महानिदेशक (ADGP), एसटीएफ भी जांच और सत्यापन की निगरानी करेंगे। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि नामित अधिकारियों में से किसी की भी लापरवाही या कार्य में ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

अगली सुनवाई की तिथि

मामले की अगली सुनवाई और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 4 नवंबर की तारीख तय की गई है। ये निर्देश जारी करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि यह सामान्य जानकारी की बात है कि बड़ी संख्या में प्राथमिक स्कूल मुख्य रूप से छात्रों की संख्या में कमी के कारण बंद हो गए हैं। कोर्ट ने कहा कि छात्रों की यह कमी संसाधनों के अभाव के कारण नहीं, बल्कि शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों के अपर्याप्त प्रदर्शन के कारण है।

Also read PGIMER Chandigarh Recruitment 2026: पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में सीनियर रेजीडेंट सहित विभिन्न पदों पर भर्ती

जानें क्या है मामाला?

यह पूरा मामला कुसुमलता नामक एक शिक्षिका द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। एसटीएफ (लखनऊ) के अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से पता चला कि याचिकाकर्ता ने कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षणिक दस्तावेजों का उपयोग करके धोखाधड़ी से नौकरी हासिल की थी, जो पहले से ही गोरखपुर में सहायक शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि राज्य में कई शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों या दूसरों के कागजात के आधार पर नौकरी पाई है और कई मामलों में एक ही सेट पर 10 या उससे अधिक लोगों ने नियुक्तियां हासिल की हैं।

MakeCAREERS360
My Trusted Source
Trusted Source ImageAdd as a preferred source on google
[

विशेष समाचार

]