चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द की गई हैं, उन्हें अब तक मिले वेतन और भत्ते वापस नहीं करने होंगे।
Press Trust of India | April 3, 2025 | 02:51 PM IST
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया और चयन प्रक्रिया को "त्रुटिपूर्ण" बताया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले पर 127 याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "पूरी चयन प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है। बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ी के साथ-साथ मामले को छुपाने के प्रयासों ने चयन प्रक्रिया को इतना नुकसान पहुंचाया है कि इसकी मरम्मत नहीं की जा सकती।"
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 22 अप्रैल 2024 के फैसले को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द की गई हैं, उन्हें अब तक मिले वेतन और भत्ते वापस नहीं करने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कर्मचारियों को राहत देते हुए उनकी नौकरी बरकरार रखी है। वहीं, सीबीआई जांच को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई की तारीख 4 अप्रैल तय की है। फैसले का पूरा ब्योरा आना अभी बाकी है।
शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि गलत तरीके से दी गई नौकरियां रद्द की जाएंगी। साथ ही राज्य सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और तीन महीने के भीतर इसे पूरा करने का आदेश दिया।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 19 दिसंबर को अंतिम सुनवाई शुरू की और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले 15, 27 जनवरी और 10 फरवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनीं।
ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और अन्य अनियमितताओं का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में राज्य द्वारा संचालित और सरकारी-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया।
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पिछले साल 7 मई को शीर्ष अदालत ने राज्य के स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा की गई नियुक्तियों को लेकर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी।
यह मामला पश्चिम बंगाल एसएससी द्वारा आयोजित 2016 की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें 24,640 पदों के लिए 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे और कुल 25,753 नियुक्ति पत्र जारी किए गए।
शीर्ष अदालत ने इसे ‘‘व्यवस्थित धोखाधड़ी’’ करार दिया। पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य एवं जीवन कृष्ण साहा भर्ती घोटाले में जांच के दायरे में आने वाले आरोपियों में शामिल हैं।