Press Trust of India | March 15, 2026 | 10:44 AM IST | 1 min read
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति और अखिल भारत हिंदू महासभा जैसे समूहों ने भी आपत्ति जताई है, कुछ का आरोप है कि यह घटना ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत फैलाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हो सकती है। यह विवाद सोशल मीडिया और परीक्षार्थियों के बीच तेजी से फैल गया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरपीबी) ने यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा में अवसरवादियों से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में दिए गए विवादास्पद "पंडित" विकल्प की जांच के आदेश दिए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं द्वारा इस पर आपत्ति जताए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
दरअसल 14 मार्च को आयोजित उप-निरीक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा के हिंदी खंड में पूछे गए इस प्रश्न में उम्मीदवारों से ऐसे व्यक्ति के लिए एक शब्द का विकल्प चुनने को कहा गया था जो अवसर के अनुसार अपना रूप बदलता है। विकल्पों में-
यूपी सरकार के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि सरकार ने इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। एक्स पर एक पोस्ट में पाठक ने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कोई भी प्रश्न "बिल्कुल अस्वीकार्य" है और उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश भाजपा सचिव अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रश्न तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि विकल्पों में "पंडित" शब्द का समावेश ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
यूपीपीआरपीबी के परीक्षा नियंत्रक ने शनिवार देर रात पुष्टि की कि पहली शिफ्ट के विशिष्ट प्रश्न की जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं, और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति का निर्धारण करके उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रश्न पत्र बाहरी गोपनीय एजेंसियों द्वारा तैयार किए जाते हैं, और गोपनीयता कारणों से बोर्ड के अधिकारी इनकी पूर्व समीक्षा नहीं करते हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (यूपीपीआरपीबी) ने कुशल खिलाड़ियों की सीधी भर्ती-2023 (कांस्टेबल सिविल पुलिस और पीएसी पदों के लिए) के तहत विभिन्न खेल विधाओं के लिए दस्तावेज सत्यापन (डीवी) और खेल कौशल परीक्षण/ट्रायल्स के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं।
Santosh Kumar