Parliament Session: कांग्रेस ने वांगचुक, परीक्षा विवाद व उच्च शिक्षा विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की
Santosh Kumar | July 20, 2026 | 02:26 PM IST | 2 mins read
केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि नीट और सीबीएसई सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे देश भर के छात्र और उनके अभिभावक भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में हैं।
नई दिल्ली: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक को लेकर केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश पर अब तक की ''सबसे अधिनायकवादी'' सरकार का शासन है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी लोकसभा में नीट और छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया।
वेणुगोपाल ने वांगचुक की भूख हड़ताल के प्रति पूर्ण एकजुटता जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की अनदेखी की है और करीब 3 सप्ताह से अनशन जारी रहने के बावजूद उनसे बातचीत नहीं की।
केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि नीट और सीबीएसई सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे देश भर के छात्र और उनके अभिभावक भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में हैं।
Parliament Monsoon Session: धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद पर बने हुए हैं और ''बेपरवाह'' हैं, जबकि प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
एआईसीसी महासचिव ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के बजाय केंद्र सरकार ने वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाना उचित समझा।
Parliament Monsoon Session: उच्च शिक्षा विधेयक की आलोचना
भाजपा सरकार को ''लोकतंत्र विरोधी, छात्र विरोधी और श्रमिक विरोधी'' करार देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस उसकी नीतियों का कड़ा विरोध करेगी और सरकार की कथित अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों के खिलाफ आंदोलन जारी रखेगी।
उन्होंने आरोप लगाया, ''मोदी सरकार देश पर शासन करने वाली सबसे अधिनायकवादी सरकार है और देश को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है।'' केसी वेणुगोपाल ने प्रस्तावित उच्च शिक्षा विधेयक की भी आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी और विश्वविद्यालयों से जुड़े निर्णय लेने के अधिकार केंद्र सरकार के पास चले जाने से राज्यों के अधिकार भी कम हो जाएंगे।
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