Press Trust of India | September 24, 2024 | 06:58 PM IST | 1 min read
राज्य सरकार ने राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए 'एनआरआई कोटा' के लाभार्थियों की परिभाषा का विस्तार किया था।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल एडमिशन में एनआरआई कोटे का दायरा बढ़ाने से संबंधित राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार की अधिसूचना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अन्य उम्मीदवारों के साथ धोखा है और यह धोखाधड़ी बंद होनी चाहिए। राज्य सरकार ने राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए 'एनआरआई कोटा' के लाभार्थियों की परिभाषा का विस्तार किया था।
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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 10 सितंबर को आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के 20 अगस्त के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें एनआरआई कोटा के तहत लाभ लेने के लिए दायरे को बढ़ाकर उनके दूर के रिश्तेदारों ‘जैसे चाचा, चाची, दादा-दादी और चचेरे भाई’’ को भी इसमें शामिल किया था।
एनआरआई कोटे के तहत मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए 15 फीसदी आरक्षण तय किया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, "यह कुछ और नहीं बल्कि पैसा कमाने की मशीन है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के कुछ सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए और हम कानून के सिद्धांतों का निर्धारण करेंगे। पीठ ने कहा, "हम सभी याचिकाओं को खारिज कर देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
कोर्ट ने कहा, "इसके हानिकारक परिणामों पर ध्यान दें। जिन अभ्यर्थियों के अंक 3 गुना अधिक होंगे, उन्हें भी नीट यूजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं मिल पाएगा।" कोर्ट ने यह भी कहा कि विदेश में बसे रिश्तेदारों को मेधावी अभ्यर्थियों से पहले प्रवेश मिल जाएगा, और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।