Santosh Kumar | May 16, 2025 | 02:31 PM IST | 2 mins read
याचिकाकर्ता के वकील मृदुल भटनागर ने दावा किया कि कुछ केंद्रों पर नीट यूजी 2025 परीक्षा मोमबत्ती की रोशनी में आयोजित कराई गई।
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नई दिल्ली: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने चिकित्सा क्षेत्र में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 4 मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) के परिणाम घोषित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने इंदौर के एक अभ्यर्थी की याचिका पर गुरुवार (16 मई) को यह निर्देश दिया।
याचिका में अभ्यर्थी ने कहा कि नीट यूजी के दौरान खराब मौसम के बाद शहर में बिजली गुल होने के कारण प्रवेश परीक्षा में उसका प्रदर्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ और उसे दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने एक अभ्यर्थी को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक नीट-यूजी 2025 का रिजल्ट घोषित न किया जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 30 जून को हो सकती है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से देशभर के करीब 21 लाख छात्र प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने प्रतिवादी एनटीए, केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब भी मांगा है।
एकल पीठ ने कहा, "प्रतिवादी 4 मई, 2025 को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में उपस्थित होने वाले याचिकाकर्ता को उचित परिस्थितियां प्रदान करने में विफल रहे हैं। परीक्षा के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली गुल हो गई थी।"
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अदालत ने कहा कि उसने 13 मई को प्रतिवादियों के वकील से संबंधित प्राधिकारियों से आवश्यक निर्देश लेने को कहा था, लेकिन उसके बाद भी 15 मई को उनकी ओर से कोई वकील अदालत में पैरवी के लिए पेश नहीं हुआ।
याचिकाकर्ता के वकील मृदुल भटनागर ने कहा, "इंदौर में नीट यूजी के लिए बनाए गए कई केंद्रों में जनरेटर या बिजली की अन्य वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी, जबकि मौसम विभाग ने 4 मई को शहर में आंधी-तूफान की चेतावनी पहले ही जारी की थी।"
उन्होंने कहा कि 4 मई को खराब मौसम के कारण कई केंद्रों पर 1 से 2 घंटे तक बिजली गुल रही, जिससे पेपर खराब हो गया। लाइव लॉ के अनुसार, भटनागर ने दावा किया कि कुछ केंद्रों पर परीक्षा मोमबत्ती की रोशनी में कराई गई।