Santosh Kumar | June 18, 2024 | 05:02 PM IST | 2 mins read
उन्होंने कहा, "24 लाख छात्र नीट परीक्षा में शामिल हुए थे। उन्होंने 16 से 18 घंटे तक परीक्षा की तैयारी की। इससे पहले लोगों ने कभी नहीं सुना था कि कोई परीक्षा पास कराने के लिए रिश्वत दे रहा हो।"
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नई दिल्ली: नीट परीक्षा 2024 में अनियमितताओं का मुद्दा इन दिनों पूरे भारत में जोरों पर है। विपक्ष भी इस संबंध में सरकार से तीखे सवाल पूछ रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मंगलवार (18 जून) को जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और नीट परीक्षा में कथित घोटाले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच शुरू करने की मांग की।
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उन्होंने कहा, "24 लाख छात्र नीट परीक्षा में शामिल हुए थे। उन्होंने 16 से 18 घंटे तक परीक्षा की तैयारी की। इससे पहले लोगों ने कभी नहीं सुना था कि कोई परीक्षा पास कराने के लिए रिश्वत दे रहा हो।" भारद्वाज ने बिहार का उदाहरण दिया, जहां 5 मई को परीक्षा से एक दिन पहले कुछ उम्मीदवारों को उनके घरों पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हम चाहते हैं कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाए और इसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जाए। यह 10वीं, 11वीं और 12वीं के लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है और आम आदमी पार्टी इन बच्चों की आवाज को मजबूती से उठाएगी।"
इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि बिहार, गुजरात और हरियाणा में हुई गिरफ्तारियां साफ तौर पर दिखाती हैं कि परीक्षाओं में व्यवस्थित भ्रष्टाचार हुआ है और ये भाजपा शासित राज्य पेपर लीक के "हब" बन गए हैं। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर नीट परीक्षा के मुद्दे पर "चुप्पी" साधने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी पार्टी पेपर लीक के खिलाफ मजबूत नीतियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गांधी ने ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी हमेशा की तरह नीट परीक्षा में 24 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के मुद्दे पर चुप हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाकर युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने का वादा किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष की जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए हम युवाओं की आवाज को सड़क से संसद तक मजबूती से उठाकर और सरकार पर दबाव बनाकर ऐसी कठोर नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ गांधी की यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय द्वारा मंगलवार को दिए गए उस बयान के बाद आई है जिसमें उसने कहा था कि नीट यूजी 2024 परीक्षा के आयोजन में अगर किसी की ओर से ‘‘0.001 प्रतिशत भी लापरवाही’’ हुई है तो उससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।