Press Trust of India | October 25, 2026 | 04:18 PM IST | 1 min read
एनसीईआरटी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), मद्रास और आईआईटी जोधपुर के परामर्श से इस गतिविधि-आधारित पाठ्यक्रम को विकसित किया है।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कृत्रिम मेधा (AI) और ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग’ पर 20 घंटे का एक प्रारंभिक पाठ्यक्रम शुरू किया है जिसके तहत 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी दैनिक जीवन में कृत्रिम मेधा के उपयोग, उदाहरणों से मशीनों के सीखने की प्रक्रिया, ‘डीपफेक’ की पहचान और व्यक्तिगत आंकड़ों की सुरक्षा से जुड़ी नैतिक सीमाओं के बारे में अध्ययन करेंगे।
एनसीईआरटी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), मद्रास और आईआईटी जोधपुर के परामर्श से इस गतिविधि-आधारित पाठ्यक्रम को विकसित किया है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझने में मदद करना है कि कृत्रिम मेधा कैसे काम करती है और इसकी क्या सीमाएं हैं।
साथ ही, उन्हें बिना सत्यापन किए इसके परिणामों पर निर्भर रहने के बजाय एआई प्रणालियों का सतर्क, आत्मविश्वासपूर्ण, रचनात्मक और जिम्मेदार उपयोगकर्ता तथा मूल्यांकनकर्ता बनने के लिए प्रेरित करना है।
एनसीईआरटी ने कहा, “जिन विद्यार्थियों को पहले से इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, उनके लिए तैयार यह पाठ्यक्रम आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ावा देता है।”
आगे कहा, “यह समस्याओं को हल करने के एक व्यवस्थित दृष्टिकोण के रूप में ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग’ का परिचय कराता है और विद्यार्थियों को यह समझने में मदद करता है कि कृत्रिम मेधा कैसे काम करती है तथा इसके अनुप्रयोग, संभावनाएं और सीमाएं क्या हैं।”
परिषद ने कहा, “यह पाठ्यक्रम कृत्रिम मेधा की अवधारणाओं, अनुप्रयोगों और सीमाओं के साथ-साथ आंकड़ों की गोपनीयता तथा प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग को समझाने के लिए गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाता है। इसमें चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास, प्रयोग और आत्मचिंतन के माध्यम से विद्यार्थियों को सीखने के अवसर दिए जाते हैं।”
उसने कहा कि ये गतिविधियां डिजिटल उपकरणों के साथ या उनके बिना भी आयोजित की जा सकती हैं, ताकि विभिन्न प्रकार के विद्यालयों में विद्यार्थी सार्थक रूप से भाग ले सकें।