NAAC ने मान्यता प्रक्रिया में की सुधार की घोषणा, उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली को किया समाप्त
Santosh Kumar | January 28, 2024 | 12:09 PM IST | 2 mins read
संगठन अब संस्थानों को ग्रेड के बजाय "बाइनरी एक्रिडिटेशन" देगा। एनएएसी ने कहा कि इस बदलाव से उच्च शिक्षा प्रणाली में गुणवत्तापूर्ण संस्कृति का निर्माण होगा।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने शनिवार (27 जनवरी) को उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर बड़ी घोषणा की। एनएएसी ने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) के लिए विवादास्पद ग्रेडिंग प्रणाली को समाप्त कर दिया है। समिति ने सुधारों को दो चरणों में लागू करने का निर्णय लिया है, एक अगले चार महीनों में और दूसरा दिसंबर 2024 तक।
पहले चरण में यह बताया जाएगा कि संस्थान मान्यता प्राप्त है या नहीं। संगठन ने इस प्रणाली को "बाइनरी एक्रिडिटेशन" का नाम दिया है। दूसरे चरण में उनका लेवल 1 से लेवल 5 तक मूल्यांकन किया जाएगा। इससे संस्थानों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
जिस संस्थान का प्रदर्शन उस क्षेत्र में जितना बेहतर होगा, उसे लेवल 1 से 5 के आधार पर उसी हिसाब से रेटिंग दी जाएगी। इससे छात्र और अभिभावक समझ सकेंगे कि संस्थान प्रवेश लेने के लिए योग्य है या नहीं। सर्वश्रेष्ठ संस्थान को 5 स्तरीय रेटिंग दी जाएगी। एनएएसी ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि इस बदलाव से उच्च शिक्षा प्रणाली में गुणवत्तापूर्ण संस्कृति का निर्माण होगा।
NAAC नई संरचनाओं को विकसित करने के लिए यह बदलाव कर रहा है। जिसके अंतर्गत बाइनरी मान्यता के साथ-साथ परिपक्वता-आधारित वर्गीकृत मान्यता की भी शुरुआत की गई है। ग्रेडिंग लेवल दिसंबर 2024 तक लागू किया जाएगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए NAAC के निदेशक गणेशन कन्नाबिरन ने कहा, "स्तर की मान्यता भारतीय संस्थानों को ऐसा करने में सक्षम बनाएगी।" एआईसीटीई के पूर्व अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि वन नेशन वन डेटा प्लेटफॉर्म डेटा प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए एचईआई से डेटा को समेकित करेगा। यह प्रणाली विश्वास आधारित और डेटा संचालित होगी।
2024 के अंत से पहले संगठन की सभी सिफारिशों को व्यापक रूप से लागू करने से भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में बदलाव आएगा। इस प्रकार यह अमृत काल को ध्यान में रखते हुए भारत के सामाजिक-आर्थिक नेतृत्व में योगदान देने का प्रयास करेगा। यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा, "प्रस्तावित बाइनरी मान्यता प्रणाली सभी संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण संस्कृति को बढ़ावा देते हुए भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।"
आपको बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के जरिए भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में तेजी से बदलाव आ रहा है। 2037 तक उच्च शिक्षा में 50% जीईआर का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले शिक्षा मंत्रालय ने मूल्यांकन और मान्यता को मजबूत करने के लिए नवंबर 2022 में इसरो के पूर्व अध्यक्ष और आईआईटी परिषद की स्थायी समिति की अध्यक्षता में इसके लिए एक समिति का गठन किया था।
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