जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर विचार के लिए 7 सदस्यीय समिति गठित की
Press Trust of India | October 19, 2026 | 10:05 PM IST | 2 mins read
छात्रसंघ बहाल करने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि समिति में वरिष्ठ डीन और प्रोफेसर शामिल हैं।
नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने, उनकी मांगों की समीक्षा करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में काम करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। विश्वविद्यालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह फैसला विश्वविद्यालय के कुलपति मजहर आसिफ की अध्यक्षता में रविवार शाम वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में लिया गया।
छात्रसंघ बहाल करने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि समिति में वरिष्ठ डीन और प्रोफेसर शामिल हैं। यह समिति प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करके उनकी शिकायतों का समाधान करने और परिसर में शांति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।
प्रशासन ने कहा कि वह आपसी विश्वास और समझ के आधार पर रचनात्मक संवाद एवं विचार-विमर्श के जरिये इस मुद्दे का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उसने प्रदर्शनकारी छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों से सहयोग की अपील भी की।
निर्वाचित छात्रसंघ को दोबारा बहाल करने की मांग
छात्रसंघ बहाल करने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और भूख हड़ताल पर बैठे हैं। विश्वविद्यालय में छात्रसंघ को 2006 में भंग कर दिया गया था। इस आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व का लंबे समय से लंबित मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
प्रदर्शनकारी एक निर्वाचित छात्रसंघ को दोबारा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने कहा कि बार-बार हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और कक्षाओं में व्यवधान की घटनाओं के बाद 2006 में छात्रसंघ के चुनाव बंद कर दिए गए थे।
उसने दिल्ली उच्च न्यायालय के 2022 के एक आदेश का भी उल्लेख किया और कहा कि अदालत ने विश्वविद्यालय को छात्र संघ चुनाव कराने का निर्देश दिए बिना मामले का निपटारा कर दिया था।
अक्टूबर 2024 में कार्यभार संभालने वाले मौजूदा प्रशासन ने कहा कि वह दो दशक पुराने गतिरोध का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय ने विभागों और केंद्रों में विषय संघों के चुनाव की मौजूदा व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
इसके तहत छात्र गुप्त मतदान के जरिए उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव करते हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों से परिसर में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने तथा संस्थान की प्रतिष्ठा और शैक्षणिक माहौल की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
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