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UPSC: केंद्र सरकार ने आईएएस, आईपीएस, आईएफओएस अधिकारियों के लिए कैडर आवंटन नीति में किया बदलाव

Press Trust of India | January 25, 2026 | 11:52 AM IST | 3 mins read

इसमें कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए भर्ती को लेकर आरक्षित रिक्तियों को केवल शहरी क्षेत्र की रिक्तियों का हिस्सा माना जाएगा।

आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारियों का चयन तीन चरणों वाली सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट)
आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारियों का चयन तीन चरणों वाली सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तीन प्रमुख केंद्रीय सेवाओं के नौकरशाहों के लिए कैडर आवंटन को लेकर एक नई नीति लागू की है, जिसमें उनकी तैनाती के लिए नए समूह समेत अन्य प्रावधान भी शामिल हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFSO) के अधिकारियों के लिए हाल में जारी की गई नीति में कहा गया है कि संबंधित मंत्रालय किसी वर्ष की एक जनवरी को “कैडर अंतराल” के आधार पर रिक्तियों का निर्धारण करेंगे।

कैडर या संयुक्त कैडर से तात्पर्य किसी राज्य या राज्यों के समूह या केंद्र शासित प्रदेशों से है जो इन तीनों सेवाओं के अधिकारियों को आवंटित किए जाते हैं, जिन्हें अखिल भारतीय सेवाएं भी कहा जाता है। इसने कैडर आवंटन के लिए पूर्व की पांच जोन प्रणाली को समाप्त कर दिया है और नए समूह पेश किए हैं जिसमें ‘‘सभी राज्य कैडर/संयुक्त कैडरों को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित किया गया है और चार समूहों में विभाजित किया गया है।’’

ग्रुप-एक में एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ हैं और ग्रुप-दो में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश शामिल हैं। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय द्वारा 23 जनवरी को जारी नीति के अनुसार, समूह-तीन में महाराष्ट्र, मणिपुर, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल हैं, जबकि समूह-चार में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

कैडर नियंत्रण प्राधिकार अर्थात् कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) / गृह मंत्रालय (एमएचए) / पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी), प्रत्येक कैडर के लिए अनारक्षित (यूआर) / अनुसूचित जाति (एससी) / अनुसूचित जनजाति (एसटी) / अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) / आंतरिक / बाहरी रिक्तियों सहित रिक्तियों का निर्धारण करेंगे। कैडर-वार/श्रेणी-वार रिक्तियों का निर्धारण परीक्षा वर्ष के बाद वाले वर्ष की एक जनवरी को मौजूद कैडर अंतर के आधार पर किया जाएगा।

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आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारियों का चयन तीन चरणों वाली सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। राज्य सरकारें किसी विशेष सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)/भारतीय वन सेवा परीक्षा के माध्यम से भरी जाने वाली रिक्तियों की कुल संख्या परीक्षा वर्ष के बाद वाले वर्ष की 31 जनवरी तक सूचित करेंगी।

अपने-अपने अधीन सेवाओं के संबंध में संबंधित कैडर-नियंत्रक प्राधिकरण कैडर में मौजूद ‘कैडर अंतराल’, राज्य सरकारों से प्राप्त मांग और कैडर में रोस्टर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न श्रेणियों (जैसे यूआर/एससी/एसटी/ओबीसी) के अनुसार रिक्तियों का निर्धारण करेंगे। इसमें कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए भर्ती को लेकर आरक्षित रिक्तियों को केवल शहरी क्षेत्र की रिक्तियों का हिस्सा माना जाएगा। इस प्रकार निर्धारित रिक्तियों की जानकारी राज्य सरकारों को दी जाएगी और संबंधित मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।

नीति में कहा गया है कि दोनों कार्रवाइयां सिविल सेवा परीक्षा/भारतीय वन सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम की घोषणा से पहले पूरी कर ली जानी चाहिए, जिसके आधार पर भर्ती की जानी है। चूंकि यह एक समयबद्ध प्रक्रिया होगी, इसलिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा के बाद राज्य सरकारों से प्राप्त अनुरोधों पर रिक्तियों का निर्धारण करते समय विचार नहीं किया जाएगा, इसमें स्पष्ट किया गया है।

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