Press Trust of India | May 7, 2026 | 06:52 PM IST | 1 min read
भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में 14.71 लाख स्कूल शामिल हैं जिनमें 24.69 करोड़ से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं।

नई दिल्ली: नीति आयोग ने देश में स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर कार्यबल गठित करने की वकालत की है। साथ ही रचनात्मक और छात्र केंद्रित शिक्षा के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) को एकीकृत करने का सुझाव दिया है। 'भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: समयगत विश्लेषण एवं गुणवत्ता सुधार के लिए नीति ढांचा' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में आयोग ने स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए 13 सिफारिशें दी हैं।
इनमें पढ़ाई और परीक्षा के तरीके में बदलाव, छात्रों की बेहतर शिक्षा और कल्याण पर जोर, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा, छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा को मजबूत करना और पढ़ाई में एआई तकनीक का इस्तेमाल शामिल है।
इसमें स्कूल व्यवस्था को बेहतर बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, प्रशासनिक सुधार, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर टीम बनाना और स्कूल प्रबंधन समितियों को अधिक मजबूत व प्रभावी बनाना शामिल है।
इसके अलावा, अन्य प्रणालीगत सिफारिशों में शिक्षक तैनाती एवं पेशेवर विकास को बेहतर बनाना, डिजिटल व प्रसारण आधारित शिक्षण का विस्तार तथा समानता और समावेश को बढ़ावा देना शामिल हैं।
भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में 14.71 लाख स्कूल शामिल हैं जिनमें 24.69 करोड़ से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं। रिपोर्ट में पिछले दशक में हुई प्रगति पर विचार करते हुए 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।
रिपोर्ट में लड़कियों और एससी-एसटी छात्रों के नामांकन में सुधार का उल्लेख किया गया है। साथ ही, महामारी के बाद छात्रों के सीखने के स्तर में सुधार और शिक्षा व्यवस्था की 11 प्रमुख चुनौतियों की पहचान भी की गई है।