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NEET UG 2024: दिल्ली एचसी ने नीट यूजी में पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्न पूछने का आरोप लगाने वाली याचिका की खारिज

Abhay Pratap Singh | August 8, 2024 | 04:20 PM IST | 2 mins read

उच्च न्यायालय ने कहा कि जहां गलती स्वयं स्पष्ट नहीं है, वहां वह विवादित प्रश्नों के सही उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन या पुनर्विश्लेषण नहीं कर सकता।

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एनटीए ने 5 मई को 4,750 केंद्रों पर नीट यूजी 2024 परीक्षा आयोजित की थी। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
एनटीए ने 5 मई को 4,750 केंद्रों पर नीट यूजी 2024 परीक्षा आयोजित की थी। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi HC) ने नीट यूजी 2024 प्रवेश परीक्षा में ‘पाठ्यक्रम से बाहर’ के प्रश्न पूछने का आरोप लगाने वाली अभ्यर्थी की याचिका को खारिज कर दिया है। दिल्ली एचसी ने कहा कि वह विशेषज्ञों के ज्ञान पर संदेह नहीं कर सकते और उनके स्थान पर अपनी राय नहीं रख सकते।

याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दावा किया कि भौतिकी सेक्शन में एक प्रश्न ‘रेडियोधर्मिता’ पर आधारित था, जबकि ‘रेडियोधर्मिता विषय’ इस वर्ष के NEET-UG के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं था। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “अदालतें विषय-वस्तु की विशेषज्ञ नहीं हैं।”

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा, “विषय विशेषज्ञों ने याचिकाकर्ता की चुनौती को इनकार कर दिया है। इसलिए, इस न्यायालय की राय है कि वह अपनी समझ को विशेषज्ञों की समझ के स्थान पर नहीं रख सकता, जो विषय की जटिलताओं और बारीकियों को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम हैं।”

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उच्च न्यायालय ने कहा कि यह विशेष प्रश्न परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा गठित विषय विशेषज्ञों के समक्ष रखा गया था। उन्होंने अपनी राय दी है कि पाठ्यक्रम में ‘परमाणु और नाभिक’ अध्याय के अंतर्गत इकाई संख्या 18 में ‘नाभिक की संरचना एवं आकार’ और ‘परमाणु द्रव्यमान’ शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा, “इस अदालत की राय है कि जब एनटीए के अकादमिक और विषय विशेषज्ञों ने राय दी है कि विवादित प्रश्न नीट यूजी-2024 के निर्धारित पाठ्यक्रम से तैयार किया गया है, तो यह अदालत विशेषज्ञों की बुद्धिमता पर संदेह नहीं कर सकती और इसके स्थान पर अपनी राय नहीं रख सकती।”

न्यायालय ने कहा कि जहां गलती स्वयं स्पष्ट नहीं है, वहां वह विवादित प्रश्नों के सही उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन या पुनर्विश्लेषण नहीं कर सकता। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने दो अन्य अभ्यर्थियों की दो अलग-अलग याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि कुछ प्रश्नों के उत्तर गलत दर्ज किए गए थे।

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