Santosh Kumar | October 25, 2024 | 02:59 PM IST | 2 mins read
एनबीई के वकील ने कहा कि अगर हम हर साल प्रश्न और आंसर-की प्रकाशित करेंगे, तो 3 साल में हमारे सभी प्रश्न खत्म हो जाएंगे।
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नई दिल्ली: नीट पीजी 2024 रिजल्ट की पारदर्शिता से जुड़ी याचिका पर आज यानी 25 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां कोर्ट ने एनबीई के वकील से नीट पीजी 2024 परीक्षा की आंसर-की जारी करने के बारे में पूछा, जिस पर एनबीई ने कहा कि हम आंसर-की जारी नहीं करेंगे, यह हमारा नियम है। इसके बाद जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनवाई को नॉन-मिसलेनियस डे पर लिस्ट करने को कहा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विभा मखीजा ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अवर सचिव ने संक्षिप्त हलफनामा दाखिल किया है। सुनवाई के दौरान एनबीई ने भी अपना जवाब दिया। याचिकाकर्ताओं ने एनबीई से उत्तर कुंजी जारी करने और काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई।
बार एंड बेंच के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता विभा मखीजा ने कहा, "सूचना ज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया है और परीक्षा कैसे आयोजित की जाएगी, इसके बारे में कोई एसओपी भी नहीं है। यहां तक कि राज्य भी काउंसलिंग आयोजित करने को लेकर असमंजस में हैं।"
एनबीई की ओर से उपस्थित वकील ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर एक सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा है और उचित और कठिन प्रश्नों की संख्या सीमित है, इसलिए उत्तर कुंजी प्रकाशित नहीं की गई है।
एनबीई के वकील ने कहा कि अगर हम हर साल प्रश्न और आंसर-की प्रकाशित करेंगे, तो 3 साल में हमारे सभी प्रश्न खत्म हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर कुंजी प्रकाशित नहीं की जाएगी, और यह बात सूचना बुलेटिन में भी दी गई थी।
पीठ ने पूछा कि क्या आरटीआई के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाएं हासिल करने की कोशिश की गई थी। एनबीई ने बताया कि ये सवाल वस्तुनिष्ठ प्रकार के हैं और कंप्यूटर से जांचे जाते हैं, जिसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता।
इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता मखीजा ने पारदर्शिता का मुद्दा उठाया। इसके बाद न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, "हमें मामले की फिर से सुनवाई करनी होगी। हम इसे गैर-विविध दिन पर सूचीबद्ध करेंगे।"
इस संबंध में नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन (एनएमओ) ने भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) को पत्र लिखा है। इसमें काउंसलिंग शेड्यूल में देरी समेत सीट मैट्रिक्स जारी न होने पर चिंता जताई गई है।
Santosh Kumar