Press Trust of India | January 19, 2026 | 09:09 AM IST | 3 mins read
मृतक छात्रा के परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था और प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।

पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पटना में चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की मौत में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। जहानाबाद जिले की 18 वर्षीय युवती इस महीने की शुरुआत में चित्रगुप्त नगर में एक निजी ‘गर्ल्स हॉस्टल’ के कमरे में बेहोश मिली थी। वह नीट की तैयारी कर रही थी। कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
मृतक छात्रा के परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था और प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। बिहार का गृह विभाग भी संभाल रहे चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पुलिस ने घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। पुलिस महानिदेशक स्वयं जांच की निगरानी कर रहे हैं। उनकी मौत में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।’’
छात्रा की मौत के बाद यहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस ने छात्रावास के मालिक को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक चिकित्सा जांच में संकेत मिला था कि छात्रा ने बड़ी संख्या में नींद की गोलियां खा ली थीं और वह टाइफाइड से पीड़ित थी। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है’’।
परिवार के आरोप के बावजूद, पुलिस ने यह दावा किया कि चिकित्सा जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज में यौन हमले का कोई संकेत नहीं मिला है। पटना पुलिस ने 13 जनवरी को एक बयान में कहा था, ‘‘चिकित्सकों को यौन हमले के कोई संकेत नहीं मिले। उन्होंने कहा कि लड़की ने बड़ी संख्या में नींद की गोलियां खाई थीं और वह टाइफाइड से पीड़ित थी।’’
इस बीच, मृतका के परिजनों ने रविवार को हॉस्टल के वार्डन, चिकित्सकों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मामले को दबाने का आरोप लगाया। मृतका के पिता ने बेटी को न्याय दिलाने की मांग करते हुए कहा, ‘‘छात्रावास के वार्डन, चिकित्सक और कुछ पुलिसकर्मी की मिलीभगत हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रावास के पदाधिकारियों ने समझौते के लिए हमें पैसे की पेशकश की और पुलिसकर्मियों ने हमें मीडिया से बात न करने की धमकी दी।’’
इस मामले से राज्य में राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए नीतीश कुमार सरकार पर ‘‘असंवेदनशील’’ होने और ‘‘अपराधियों को संरक्षण देने’’ का आरोप लगाया। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से जांच की निगरानी करने का आग्रह किया।
पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।
मामले की जांच कर रही एसआईटी ने 18 जनवरी, 2026 को उन निजी अस्पतालों का दौरा किया जहां पहले छात्रा का इलाज किया गया था और उनके कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। अधिकारियों ने बताया कि छात्रावास में रहने वाली कई लड़कियां रविवार को अपना सामान लेने के लिए परिसर में गईं, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें स्थानीय थाने जाने को कहा।