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Delhi News: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 3 साल बाद भी शुरू नहीं हुए हेल्थ क्लीनिक, आरटीआई में मिली जानकारी

Press Trust of India | December 31, 2025 | 04:27 PM IST | 3 mins read

इस परियोजना का लक्ष्य तीन महीनों के भीतर सौ प्रतिशत बच्चों की जांच कर सामने आई बीमारियों का विशेष चिकित्सकों की मदद से इलाज कराना था।

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर एक आवेदन में शिक्षा निदेशालय से यह जानकारी मिली है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर एक आवेदन में शिक्षा निदेशालय से यह जानकारी मिली है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: दिल्ली के सरकारी विद्यालयों में छात्र- छात्राओं को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए 2022 में प्रायोगिक आधार पर 20 विद्यालयों में ‘हेल्थ क्लीनिक’ बनाये गये थे लेकिन 12 स्कूलों में तीन साल बाद भी ये क्लीनिक शुरू नहीं हुए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर एक आवेदन में शिक्षा निदेशालय से यह जानकारी मिली है। 2022 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इस परियोजना की शुरुआत की थी। यह परियोजना बीएसईएस और दिल्ली सरकार की एक संयुक्त पहल थी, जिसमें दक्षिण, पश्चिम, पूर्वी और मध्य दिल्ली के 20 सरकारी विद्यालयों को चुना गया था।

परियोजना का लक्ष्य -

इस परियोजना का लक्ष्य तीन महीनों के भीतर सौ प्रतिशत बच्चों की जांच कर सामने आई बीमारियों का विशेष चिकित्सकों की मदद से इलाज कराना था। बीमारी का पता लगने पर जांच से लेकर इलाज तक सभी पर निगरानी रखी जानी थी। इन ‘हेल्थ क्लीनिक’ के जरिये सरकारी विद्यालयों में बच्चों की नियमित जांच के अलावा ओपीडी की सुविधा, ‘फर्स्ट एड’ और दवाइयां देने का भी प्रावधान था। इसके अलावा इस परियोजना के जरिये सरकारी स्कूल के बच्चों को मानसिक व भावनात्मक कल्याण संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जानी थी।

दिल्ली स्वास्थ्य सेवा निदेशालय -

आरटीआई के जवाब में दिल्ली सरकार के दिल्ली स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीजीएचएस) की ‘स्कूल हेल्थ स्कीम’ की कार्यालय प्रमुख डॉ. शालिनी वर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को ईमेल के जरिए बताया कि निदेशालय ने स्कूल हेल्थ स्कीम को 6 जुलाई 2022 को 20 पोर्टाकेबिन सौंपे थे और 8 जुलाई 2022 को सात एमबीबीएस चिकित्सक, 20 जन स्वास्थ्य नर्सिंग अधिकारी (पीएचएनओ) और 20 नर्सिंग ऑफिसर को इन 20 ‘हेल्थ क्लीनिक’के लिए नियुक्त गया था।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, जिन 20 विद्यालयों में इस परियोजना को प्रायोगिक परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया था, उनमें से अधिकतर में क्लीनिक शुरू ही नहीं हुए हैं।

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आरटीआई में मिला जवाब -

आरटीआई के मुताबिक, रानी बाग स्थित राजकीय सह शिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ने बताया कि स्कूल में क्लीनिक तो बनाया गया लेकिन वह अब तक शुरू नहीं हुआ है। वहीं आनंदवास स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय ने आरटीआई के जवाब में बताया कि स्कूल में हेल्थ क्लीनिक का निर्माण तो किया गया है लेकिन ये अब तक शुरू नहीं हुआ है और न ही इसके लिए अब तक किसी स्टाफ को नियुक्त किया गया है। शकूरपुर स्थित राजकीय सह शिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ने भी आरटीआई में यही जवाब दिया।

इनके अलावा चांदपुर माजरा स्थित राजकीय सर्वोदय विद्यालय ने भी जवाब में बताया है कि स्कूल में स्वास्थ्य क्लीनिक योजना के तहत क्लीनिक खोला गया लेकिन इसके लिए किसी डॉक्टर को नियुक्त नहीं किया गया है।

डॉक्टर की नहीं हुई नियुक्ति -

आरटीआई से प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि कई अन्य विद्यालयों में भी ऐसी ही स्थिति है जिनमें लाडपुर स्थित राजकीय बाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कराला स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय, त्रिनगर स्थित राजकीय सह शिक्षा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भारत नगर स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय व राजकीय बाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रामपुरा न्यू स्थित राजकीय सह शिक्षा सर्वोदय विद्यालय, वजीरपुर जेजे कॉलोनी स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय और शालीमार बाग स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय शामिल हैं।

दिल्ली स्कूल हेल्थ क्लीनिक -

इन सभी स्कूलों का कहना था कि उनके यहां ‘हेल्थ क्लीनिक’ तो हैं लेकिन ये अक्टूबर 2025 के अंत तक शुरू नहीं हुए थे। शिक्षा निदेशालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इनके अलावा वजीरपुर की जेजे कॉलोनी स्थित राजकीय बाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीतमपुरा स्थित राजकीय बाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अशोक विहार फेस 2 स्थित राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय, शालीमार बाग स्थित राजकीय बाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित स्वामी दयानंद सर्वोदय कन्या विद्यालय और मोती बाग स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में भी ‘हेल्थ क्लीनिक’ हैं लेकिन इन्होंने चिकित्सकों या नर्सिंग ऑफिसर के होने की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इनके अलावा दो सरकारी स्कूल ऐसे भी हैं, जहां ये हेल्थ क्लीनिक बनाये तो गये लेकिन जानकारी नहीं दी गई।

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