Press Trust of India | January 15, 2025 | 01:41 PM IST | 3 mins read
चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि वह इस विवाद पर आधिकारिक फैसले के लिए मामलों को एक उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भेजने के पक्ष में है।
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने बुधवार (15 जनवरी) को कहा कि वह ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ (CLAT) 2025 के परिणामों के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं को किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकता है। दिल्ली और कर्नाटक समेत कई हाई कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें आरोप हैं कि क्लैट 2025 में कई सवाल गलत थे।
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विभिन्न उच्च न्यायालयों (HC) में विभिन्न पक्षों की ओर से पेश वकीलों को नोटिस जारी करते हुए प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि वह इस विवाद पर आधिकारिक फैसले के लिए मामलों को एक उच्च न्यायालय, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भेजने के पक्ष में है। पीठ अब क्लैट 2025 को लेकर कथित विवाद पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ (CNLU) की स्थानांतरण याचिकाओं पर सुनवाई 3 फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में करेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित रिट याचिकाओं का निस्तारण एक उच्च न्यायालय में होना चाहिए। चूंकि यह शीघ्र होगा, इसलिए नोटिस जारी किए जाएं जिनके जवाब 3 फरवरी, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में दिए जाएं। विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होने वाले वकीलों को नोटिस दिए जाएंगे। पीठ का विचार है कि मामले को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जा सकता है।’’
सीएनएलयू ने अधिवक्ता पृथा श्रीकुमार अय्यर के माध्यम से याचिका दायर की थी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उसकी ओर से पक्ष रखा। एक अभ्यर्थी ने हाल में दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ को सूचित किया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में कई याचिकाएं लंबित हैं और स्थानांतरण याचिकाएं शीर्ष अदालत के समक्ष दायर की जाएंगी।
इसके बाद उच्च न्यायालय ने एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर 30 जनवरी को सुनवाई करना तय किया। 20 दिसंबर 2024 को दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने उत्तर कुंजी में त्रुटियों को लेकर क्लैट-2025 के परिणाम को संशोधित करने के लिए संघ को निर्देश दिया।
एकल न्यायाधीश का फैसला क्लैट के एक अभ्यर्थी की याचिका पर आया। फैसले में कहा गया कि प्रवेश परीक्षा में दो प्रश्नों के उत्तर गलत थे। याचिका में 7 दिसंबर, 2024 को संघ द्वारा प्रकाशित उत्तर कुंजी को चुनौती दी गई थी, जबकि कुछ प्रश्नों के सही उत्तर घोषित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। एकल न्यायाधीश ने कहा कि त्रुटियां पूरी तरह स्पष्ट थीं और ‘उन पर आंखें मूंद लेना’ अन्याय के समान होगा।
अभ्यर्थी ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें अन्य दो प्रश्नों पर उसकी प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया था, वहीं संघ ने एकल न्यायाधीश के निर्णय के विरुद्ध याचिका दायर की।
बीते 24 दिसंबर, 2024 को चुनौतियों की सुनवाई करने वाली एक खंडपीठ ने दो प्रश्नों पर एकल न्यायाधीश के आदेश में प्रथम दृष्टया कोई त्रुटि न पाए जाने के बाद कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया और कहा कि संघ न्यायाधीश के निर्णय के अनुसार परिणाम घोषित करने के लिए स्वतंत्र है। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) में 5 वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्लैट, 2025 का आयोजन एक दिसंबर को किया गया था और परिणाम की घोषणा सात दिसंबर को की गई थी।