आईआईटी मंडी ने एडवांस्ड थर्मोइलेक्ट्रिक मैटीरियल्स के माध्यम से उन्नत ऊर्जा दक्षता का मार्ग प्रशस्त किया
Abhay Pratap Singh | August 16, 2024 | 02:58 PM IST | 3 mins read
शोधकर्ताओं ने उच्च विद्युतीय तथा खराब तापीय गुणों वाले थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थों तथा सुपरआयनिक कंडक्टरों के अध्ययन में अत्याधुनिक प्रगति की है।
नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (IIT Mandi) के शोधकर्ताओं ने थर्मोइलेक्ट्रिक मैटीरियल्स के क्षेत्र में अत्याधुनिक नवीन प्रगति की है। जो जटिल क्रिस्टल संरचना और खराब तापीय चालकता वाले सुपरआयोनिक कंडक्टरों का उपयोग करके थर्मल ऊर्जा संचयन के क्षेत्र में आता है, जिससे नई अंतर्दृष्टि सामने आई है जो ऊर्जा दक्षता और स्थिरता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।
खाना पकाने के बर्तनों और बिजली के तारों में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली धातुएं अपनी उच्च तापीय और विद्युत चालकता के लिए जानी जाती हैं। हालांकि, थर्मोइलेक्ट्रिक पदार्थ गर्मी के खराब कंडक्टर होने के बावजूद बिजली का कुशलतापूर्वक संचालन करके इस मानदंड को चुनौती देते हैं। यह विशिष्ट गुण उन्हें प्रशीतन, ऊर्जा उत्पादन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में थर्मल प्रबंधन जैसे अनुप्रयोगों के लिए अत्यधिक उपयुक्त बनाता है।
आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज के डॉ. अजय सोनी ने डॉ. केवल सिंह राणा, आदित्य सिंह, निधि, अनिमेष भुई, डॉ. चंदन बेरा और प्रो. कनिष्क बिस्वास के साथ मिलकर बड़े यूनिट सेल मिनरल चाल्कोजेनाइड्स पर गहन अध्ययन किया है। ये पदार्थ अद्वितीय इलेक्ट्रॉनिक और कंपन गुण प्रदर्शित करते हैं। शोध से पता चलता है कि क्रिस्टल जालकों के भीतर अनियमित परमाणु कंपन, जो तापीय चालकता को काफी कम कर देता है, थर्मोइलेक्ट्रिसिटी के साथ-साथ थर्मल प्रबंधन अनुप्रयोगों के लिए उनकी प्रभावशीलता को बढ़ाता है।
अपने निष्कर्षों के प्रभाव पर जोर देते हुए डॉ. सोनी ने कहा, “सल्फोसाल्ट टेट्राहेड्राइट्स में अनहार्मोनिक रैटलिंग पर हमारा शोध इन ठोस पदार्थों पर तापीय प्रबंधन को समझने के लिए परमाणु स्तर पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। यह प्रगति थर्मोइलेक्ट्रिक मैटीरियल्स में क्रांति लाने की क्षमता रखती है, जिससे अधिक कुशल शीतलन प्रणाली और ऊर्जा पुनर्प्राप्ति तकनीकें विकसित होंगी। हमारे शोध को विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड, अब एएनआरएफ, भारत सरकार के मुख्य अनुसंधान अनुदान द्वारा समर्थित किया जाता है।”
एक अलग अध्ययन में टीम ने सुपरआयोनिक कंडक्टरों की जांच की जिसमें चांदी और तांबा शामिल हैं, जो अपनी उत्कृष्ट आयोनिक चालकता के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, यह पदार्थ प्रकृति में क्रिस्टलीय हैं, फिर भी उनकी तापीय चालकता कांच जैसे मैटीरियल्स के बराबर है। यह पदार्थ मध्य तापमान सीमा में ऊष्मा संचयन के लिए और भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए उन्नत बैटरी प्रौद्योगिकी और ठोस-अवस्था इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
इस सन्दर्भ में डॉ. सोनी ने कहा, “इन सुपरआयोनिक और सल्फोसाल्ट टेट्राहेड्राइट यौगिकों में चांदी और तांबे के परमाणुओं के विस्तृत कंपन की जांच करके, हमने ऐसी जानकारियां प्राप्त की हैं जो ऊर्जा रूपांतरण और भंडारण उपकरणों में उपयोग की जाने वाली मैटीरियल्स को बेहतर बना सकती हैं। यह शोध सामग्री विज्ञान और ऊर्जा प्रौद्योगिकी में एक रोमांचक प्रगति को दर्शाता है।”
आईआईटी मंडी का शोध खराब तापीय गुणों की उत्पत्ति का खुलासा करके पदार्थ विज्ञान में एक बड़ी प्रगति को दर्शाता है। यह स्पष्ट करके कि परमाणु कंपन तापीय चालकता को कैसे प्रभावित करते हैं, शोधकर्ताओं का काम अनुकूलित तापीय गुणों वाली मैटीरियल्स के डिजाइन को सक्षम बनाता है।
इन खोजों में ऊर्जा प्रबंधन और स्थिरता में नवाचारों को बढ़ावा देने की क्षमता है। ऊर्जा दक्षता में उल्लेखनीय सुधार और सुपरआयोनिक कंडक्टरों को आगे बढ़ाकर, यह शोध कई क्षेत्रों में अधिक टिकाऊ समाधान बनाने के लिए आशाजनक मार्ग प्रदान करता है। इन निष्कर्षों का परिवर्तनकारी प्रभाव सामग्री विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत करता है, जो विभिन्न उद्योगों में अधिक कुशल ऊर्जा प्रबंधन और अभूतपूर्व प्रौद्योगिकियों का मार्ग प्रशस्त करता है।
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